
महल में ऐसा सन्नाटा था कि लोगों की साँसों की आवाज़ तक सुनाई दे रही थी।
आरना वहीं खड़ी थी।
उसकी आँखें नम थीं।
दिल भारी था।
और सामने...
आकाश में अंधकार सम्राट उसे देख रहा था।
नफ़रत से नहीं।
प्रेम से भी नहीं।
बल्कि उस दर्द से...
जो सदियों तक किसी के दिल में कैद रहा हो।
"अब तुम्हें सब याद आ गया..."
उसने धीमे स्वर में कहा।
आरना कुछ नहीं बोली।
क्योंकि सचमुच उसे सब याद आ चुका था।
नील...
उसकी मुस्कान...
उसका प्रेम...
उसकी टूटी हुई आँखें...
सब कुछ।
लेकिन तभी एक आवाज़ गूँजी।
"आरना!"
वह आरव था।
उसकी आवाज़ में बेचैनी थी।
डर था।
और शायद...
थोड़ी जलन भी।
आरना ने उसकी ओर देखा।
पहली बार उसने महसूस किया कि आरव की आँखों में एक अनकहा सवाल था।
वही सवाल जो उसके दिल को अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।
"क्या तुम उससे प्रेम करती थीं?"
यह सवाल सुनते ही पूरे महल में सन्नाटा छा गया।
आरना की पलकें झुक गईं।
उसने झूठ बोलने की कोशिश नहीं की।
"हाँ।"
सिर्फ एक शब्द।
लेकिन उस एक शब्द ने आरव का दिल तोड़ दिया।
उसके चेहरे की सारी चमक जैसे गायब हो गई।
आरना का दिल भी दुखा।
क्योंकि वह जानती थी—
यह सुनना आरव के लिए आसान नहीं था।
आकाश में खड़ा अंधकार सम्राट बस चुपचाप यह सब देख रहा था।
उसकी आँखों में कोई जीत नहीं थी।
सिर्फ पीड़ा थी।
आरव धीरे-धीरे पीछे हट गया।
"तो यह सच है..."
उसने धीमी आवाज़ में कहा।
"मैं हमेशा देर से आया।"
"आरव..."
"नहीं।"
उसने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।
"मुझे थोड़ा समय चाहिए।"
इतना कहकर वह वहाँ से चला गया।
आरना उसे रोकना चाहती थी।
लेकिन शब्द उसके गले में अटक गए।
---
उस रात...
चंद्रलोक पर अजीब सी उदासी छाई हुई थी।
आरव अकेला महल की सबसे ऊँची मीनार पर खड़ा था।
सामने पूरा राज्य दिखाई दे रहा था।
लेकिन उसके मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी।
नील।
वह व्यक्ति...
जो आरना का पहला प्रेम था।
"शायद मैं कभी उसके जितना महत्वपूर्ण नहीं बन पाऊँगा..."
उसने खुद से कहा।
तभी पीछे से कदमों की आहट आई।
आरना थी।
कुछ देर दोनों चुप रहे।
हवा धीरे-धीरे बह रही थी।
चाँद ऊपर चमक रहा था।
लेकिन दोनों के दिलों में तूफान था।
"तुम मुझसे नाराज़ हो?"
आरना ने धीरे से पूछा।
आरव मुस्कुराया।
लेकिन वह मुस्कान दर्द से भरी थी।
"नाराज़?"
"नहीं।"
"बस डर गया हूँ।"
आरना ने हैरानी से उसकी ओर देखा।
"डर?"
"हाँ।"
उसकी आवाज़ काँप गई।
"कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें सब याद आ जाए..."
"और तुम फिर से उसे चुन लो।"
यह सुनते ही आरना का दिल कसकर सिकुड़ गया।
उसने पहली बार महसूस किया कि आरव कितना अकेला था।
कितना डरा हुआ था।
वह धीरे-धीरे उसके पास आई।
"आरव..."
"जो हुआ वह अतीत था।"
"लेकिन मैं..."
वह रुक गई।
दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं।
"मैं अब वह आर्या नहीं हूँ।"
आरव ने उसकी ओर देखा।
उनकी आँखें मिलीं।
और पहली बार...
आरना ने बिना किसी डर के कहा—
"मैं आज की आरना हूँ।"
कुछ पल तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर आरव की आँखों में हल्की सी उम्मीद लौटी।
लेकिन उसी क्षण...
आकाश अचानक काला पड़ गया।
एक भयानक गर्जना पूरे राज्य में गूँज उठी।
दोनों ने ऊपर देखा।
और उनके चेहरे का रंग उड़ गया।
आकाश में एक नहीं...
दस नहीं...
बल्कि हजारों काले पंखों वाले राक्षस उड़ रहे थे।
उनकी आँखें लाल थीं।
और वे सीधे चंद्रलोक की ओर बढ़ रहे थे।
महल में खतरे का शंख बज उठा।
सैनिक दौड़ने लगे।
लोग चीखने लगे।
तभी अंधकार सम्राट की आवाज़ गूँजी—
"वह आ चुका है..."
आरना का दिल बैठ गया।
"कौन?"
अंधकार सम्राट ने पहली बार डर से भरी आँखों से आकाश की ओर देखा।
"जिसने मुझे बनाया..."
"जिसने मेरे भीतर अंधकार बोया..."
"मेरा स्वामी..."
और तभी...
बादलों के बीच दो विशाल लाल आँखें खुलीं।
इतनी विशाल...
कि पूरा चंद्रलोक उनके सामने छोटा लग रहा था।
धरती काँप उठी।
समुद्र उफान मारने लगे।
और एक आवाज़ पूरे ब्रह्मांड में गूँज उठी—
"चंद्रदेवी की उत्तराधिकारी..."
"मैं तुम्हें लेने आया हूँ..."
आरना का खून जम गया।
क्योंकि वह आवाज़...
किसी राक्षस की नहीं थी।
वह किसी देवता की थी।
एक पतित...
अंधकारमय देवता की।
और अब...
असली युद्ध शुरू होने वाला था।
*********
आगे-
अंधकार देवता का असली परिचय
नील का पूरा अतीत
आरव और नील आमने-सामने
और आरना के दिल का सबसे कठिन फैसला ..
Stay tuned guys......

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